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विधानसभा अध्यक्ष ने मालन पुल टूटने पर नाराजगी जताई, जांच के दिए गए आदेश

 उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण द्वारा कोटद्वार में भारी बारिश के कारण मालन पुल के टूटने को लेकर शुक्रवार को गहरी नाराजगी व्यक्त किए जाने के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए।
प्रदेश के लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज पांडे ने बताया कि उन्होंने विभागाध्यक्ष को कोटद्वार तथा हरिद्वार में पुलों के क्षतिग्रस्त होने के कारणों की गहन जांच कर तीन दिन में रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है।
कोटद्वार से विधायक भूषण का एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें वह पुल का निरीक्षण करने के बाद प्रदेश के आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत सिन्हा से फोन पर बात करते हुए घटना पर रोष प्रकट कर रही हैं।
भूषण ने सचिव से कहा कि वह पुलों की मरम्मत के बारे में आपदा प्रबंधन विभाग, लोक निर्माण विभाग और जिलाधिकारी को लगातार एक साल से चिट्ठी लिख रही हैं और हर बैठक में इस ओर ध्यान दिला रही हैं लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि पुल के टूटने से उनके क्षेत्र की आधी जनसंख्या का संपर्क टूट गया है और इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान होना चाहिए। भूषण प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिग्गज नेता भुवन चंद्र खंडूरी की पुत्री हैं।
पौड़ी जिले के कोटद्वार में बृहस्पतिवार को भारी बारिश के दौरान मालन नदी पर बना 325 मीटर लंबा पुल बीच से टूट गया था। इस दौरान पुल से गुजर रहे तीन लोगों में से एक नदी में बह गया था जबकि दो अन्य घायल हो गए थे।
राज्य आपदा प्रतिवादन बल की टीम ने गहन तलाशी अभियान चलाकर प्रसन्न कुमार डबराल नाम के व्यक्ति का शव बरामद कर लिया है। यह शव उत्तर प्रदेश की सीमा के अंदर चतुर्वाला गांव के निकट से बरामद किया गया। प्रशासन ने डबराल के परिजनों को आपदा मद से चार लाख रुपए की अनुग्रह राशि प्रदान की है।

इसके अतिरिक्त हरिद्वार के ग्रामीण इलाके में भी एक पुल का खंभा क्षतिग्रस्त होने की सूचना है।
प्रदेश में विभिन्न जगहों पर बंद सड़कों तथा पुलों पर यातायात बाधित होने के संबंध में पांडे ने अपने विभाग के अधिकारियों के अलावा सीमा सड़क संगठन, राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिकारियों के साथ एक बैठक की।
बैठक में उन्होंने भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो रहे पुलों की समुचित मरम्मत करने तथा समय-समय पर उनकी जांच करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पुलों पर उनकी भार क्षमता से ज्यादा वजन के वाहनों या यातायात का संचालन न हो।

पांडे ने किसी भी मार्ग के एक सप्ताह से अधिक समय तक अवरूद्ध रहने पर उसकी सूचना उच्चाधिकारियों को देने के निर्देश भी दिए।
पांडे ने मानसून के दौरान अधिकारियों को अलर्ट पर रहने, अवकाश पर न जाने, फोन पर उपलब्ध रहने, बंद मार्गों को तत्काल खोलने, भूस्खलन की संभावना वाले क्षेत्रों में पहले से मशीन तैनात रखने तथा जल्द वैकल्पिक मार्ग बनाने के निर्देश भी दिए।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 395 मार्ग अवरूद्ध हैं जिन्हें खोलने के लिए 478 मशीन लगायी गयी हैं।

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