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World Junior Squash Championship: अनाहत सिंह ने रचा इतिहास, Gold Medal जीतने वाली पहली भारतीय बनीं

भारतीय खेल जगत के लिए स्क्वैश से एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। देश की युवा खिलाड़ी अनाहत सिंह ने विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप का खिताब जीतकर नया इतिहास रच दिया है। वह इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। उनकी इस उपलब्धि को भारतीय स्क्वैश के लिए एक नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है।


फाइनल मुकाबले में शीर्ष वरीयता प्राप्त अनाहत सिंह ने दूसरी वरीयता प्राप्त मिस्र की खिलाड़ी सालेम को सीधे तीन खेलों में 11-3, 11-7 और 11-9 से हराकर खिताब अपने नाम किया। पूरे मुकाबले के दौरान अनाहत ने शुरुआत से अंत तक शानदार नियंत्रण बनाए रखा और अपने प्रतिद्वंद्वी को वापसी का कोई बड़ा मौका नहीं दिया। मौजूद जानकारी के अनुसार उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में छह मुकाबले खेले और इस दौरान केवल दो खेल गंवाए, जो उनके शानदार प्रदर्शन को दर्शाता है।


बता दें कि इससे पहले भारत की दिग्गज खिलाड़ी जोशना चिनप्पा वर्ष 2005 में विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के फाइनल तक पहुंची थीं, लेकिन उपविजेता रहीं। पिछले दो दशकों से यही भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। अब अनाहत सिंह ने न केवल उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है, बल्कि पहली बार भारत को इस प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक भी दिलाया है।


पीएम मोदी ने भी अनाहत सिंह को इस ऐतिहासिक सफलता पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि अनाहत की यह उपलब्धि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है और इससे युवाओं के बीच स्क्वैश खेल के प्रति रुचि और बढ़ेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह जीत आने वाले खिलाड़ियों को भी प्रेरित करेगी.


गौरतलब है कि अनाहत सिंह ने पूरे टूर्नामेंट में लगातार शानदार खेल दिखाया। उन्होंने पहले दौर में ऑस्ट्रेलिया की लिली विल्सन को सीधे खेलों में हराया। इसके बाद हांगकांग की पुई यिन क्लोई लो और मलेशिया की डॉयस ये सान ली को हराकर अंतिम आठ में जगह बनाई। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने मिस्र की हबीबा रिज्क को 3-1 से मात दी। इसके बाद सेमीफाइनल में एक और मिस्र की खिलाड़ी बार्ब सामेह को 11-3, 8-11, 11-4 और 11-6 से हराकर फाइनल का टिकट हासिल किया।


अनाहत की यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने लड़कियों की विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप में मिस्र के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे को भी समाप्त कर दिया। वर्ष 2011 से लगातार इस प्रतियोगिता का खिताब मिस्र की खिलाड़ी ही जीतती आ रही थीं। इस बार अनाहत ने उस सिलसिले को तोड़ते हुए भारत का नाम इतिहास में दर्ज करा दिया है।


बता दें कि पिछले वर्ष काहिरा में आयोजित इसी प्रतियोगिता में अनाहत सिंह ने कांस्य पदक जीता था। उस समय उन्होंने 15 वर्षों बाद भारत को व्यक्तिगत पदक दिलाया था। इस बार उन्होंने एक कदम और आगे बढ़ते हुए स्वर्ण पदक जीतकर अपने प्रदर्शन को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।


अनाहत वर्तमान में वरिष्ठ वर्ग की पेशेवर स्क्वैश रैंकिंग में दुनिया की शीर्ष 20 खिलाड़ियों में शामिल हैं। अब उनकी नजर वर्ष 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले ओलंपिक खेलों पर होगी, जहां पहली बार स्क्वैश को भी शामिल किया जाएगा। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अनाहत इसी तरह का प्रदर्शन जारी रखती हैं तो आने वाले वर्षों में वह भारत के लिए ओलंपिक स्तर पर भी बड़ी उम्मीद बन सकती हैं।

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