असम में लोगों ने भव्य भोज के आयोजन के साथ ‘भेला घर’ और ‘मेजिस’ को जलाया तथा खेती और फसल से जुड़ा उत्सव माघ बिहू मनाया। राज्य में लगभग नौ वर्षों के बाद सोमवार को पारंपरिक बुलबुल पक्षियों की लड़ाई का पारंपरिक खेल भी आयोजित किया गया।
माघ बिहू को ‘भोगली बिहू’ भी कहा जाता है। इसे असमिया माह पुह (दिसंबर-जनवरी) के तहत फसलों की कटाई के मौसम के समापन का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर भोज का आयोजन किया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस अवसर पर असम के लोगों को शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘फसल की सुंदरता हर किसी के जीवन में आशा और खुशी लेकर आये।’’
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी असम के लोगों को बधाई देते हुये कहा, ‘‘यह उत्सव सभी के जीवन में सुख और समृद्धि प्रदान करे।’’
असम के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने लोगों से अपील की कि राज्यभर में प्रेम और आपसी सम्मान के संदेश को बढ़ावा देकर एकजुटता को मजबूत करें।
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने उम्मीद जताई कि माघ बिहू सकारात्मक ऊर्जा का संचार करके सुख, शांति और अपार समृद्धि का संदेश लाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘खेतों में लहलहाती सुनहरी नयी फसलें राष्ट्र तथा राष्ट्रवासियों के जीवन को रोशन करें। मैं भोगली की प्रचुरता और परिपूर्णता से सभी लोगों के बीच सद्भाव की भावना को मजबूत करने की कामना करता हूं।’’
एक सप्ताह तक चलने वाला यह उत्सव भोज के आयोजन ‘उरुका’ के साथ शुरू हो जाता है, जो संक्रांति से एक दिन पहले रविवार की रात मनाया गया।
इसके तहत लोगों ने रात के खाने में मौसमी सब्जियों, हाल ही में काटी गई धान की फसल के चावल और विभिन्न प्रकार के मांस (जैसे चिकन, बत्तख, मटन, कबूतर, मछली) के व्यंजन तैयार किये। ज्यादातर युवाओं ने अपने घरों के बाहर ‘भेला घर’ और ‘मेजिस’ में एक साथ भोज का आनंद लिया।
बांस, सूखे पत्तों और घास की मदद से ‘भेला घर और ‘मेजिस’ तैयार किये जाते हैं और इसके आसपास लोग नृत्य करते हैं तथा पर्व का आनंद लेते हैं।
बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने के बाद सोमवार को भोर में ‘भेला घर’ और ‘मेजिस’को जला दिया गया।
लोगों ने एक नयी सकारात्मक शुरुआत और अगले साल अच्छी फसल के लिए भी प्रार्थना की।
बुलबुल पक्षियों की लड़ाई के पारंपरिक खेल के संबंध में असम सरकार की ओर से 11 जनवरी को जारी नये निर्देश के बाद सोमवार को इस खेल का आयोजन किया गया। अदालत की ओर से इस आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। नौ वर्षों के अंतराल के बाद यह आयोजन हुआ।
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और उनके परिवार के लोगों ने माघ बिहू के दिन सुबह कामरूप जिले के हाजो में हयग्रीव माधव मंदिर का दौरा किया और पर्यटकों के साथ पक्षियों की लड़ाई देखी।
पक्षियों की लड़ाई देखने के बाद उन्होंने कहा, ‘‘पारंपरिक रीति-रिवाजों को आगे बढ़ाना हमारी नीतियों का आधार रहा है। लगभग एक दशक के बाद, मैं बुलबुल लड़ाई देख पाया हूं, यह एक सर्वोत्कृष्ट बिहू परंपरा है जिसे हाल ही में हमारी सरकार ने दोबारा शुरू कराया है।