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Jammu and Kashmir में परंपरागत हर्षोल्लास के साथ मनाई गई बैसाखी

जम्मू-कश्मीर में शुक्रवार को सिख नववर्ष की शुरुआत के मौके पर धार्मिक उत्साह और उल्लास के साथ बैसाखी मनाई गई और विभिन्न गुरुद्वारों में श्रद्धालुओं ने मत्था टेका।
मुख्य समारोह शहर के रेनवाड़ी इलाके में गुरुद्वारा चट्टी पातशाही में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में सिख श्रद्धालु शामिल हुए।
सिख समुदाय के सदस्यों द्वारा घाटी के विभिन्न जिलों में भी समारोह आयोजित किए गए।
बैसाखी का त्योहार सिख नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है और मुख्य रूप से उत्तर भारतीय राज्यों- पंजाब और हरियाणा- में मनाया जाता है।

यह 1699 में गुरु गोबिंद सिंह के अधीन योद्धाओं के खालसा पंथ के गठन का स्मरणोत्सव भी है।
विश्वास और धार्मिक मान्यताओं से ऊपर उठकर, पूरे कश्मीर में तैनात सेना के जवानों ने भी बैसाखी मनाई।
मुख्य समारोह शहर के बाहरी इलाके में एचएमटी क्षेत्र में एक सैन्य शिविर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर सेना के श्रीनगर स्थित 15 कोर या चिनार कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल ए.डी.एस. औजला और पुलिस तथा सेना के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
हवलदार अजय कुमार ने संवाददाताओं को बताया, “सभी धर्मों के सैन्यकर्मी एक साथ बैसाखी मनाते हैं। इससे देश को एक कड़ा संदेश भी जाता है कि हमें मिल-जुलकर त्योहार मनाना चाहिए, मिल-जुलकर रहना चाहिए और देश को खुशहाली के रास्ते पर आगे बढ़ाना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग भी सेना के साथ त्योहार मनाते हैं। उन्होंने कहा, “हमें नहीं लगता कि हम अपने परिवारों से बहुत दूर हैं, क्योंकि यह हमारे लिए एक परिवार है।”
एक अन्य सैन्यकर्मी हवलदार सरबजीत सिंह ने कहा कि बैसाखी उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है और “हम सभी भाई मिलकर इस त्योहार को मनाते हैं”।
यह त्योहार शहर में प्रसिद्ध मुगल उद्यानों के उद्घाटन का भी प्रतीक है।
जम्मू संभाग में बैसाखी मेला “बसोआ” आयोजित किया गया और पारंपरिक डोगरा लोकाचार के सभी घटकों, जैसे डोगरा व्यंजनों, वेशभूषा, कला, शिल्प के साथ-साथ स्थानीय लोककथाओं के वर्णन को शामिल किया गया।

जम्मू में डोगरा चौक, विवेकानंद चौक, राजिंदर बाजार, कनक मंडी, पुरानी मंडी, जैन बाजार पक्का डांगा से ‘मुबारक मंडी हेरिटेज कॉम्प्लेक्स’ की ओर जाने वाले रास्ते में सैकड़ों लोग इस मौके पर पदयात्रा में शामिल हुए।
पर्यटन विभाग के अधिकारियों, गणमान्य नागरिकों, लोक नर्तकों के साथ-साथ खूबसूरती से सजाए गए हाथियों, घोड़ों, ऊंटों और रथों सहित प्रतिभागियों का पुराने शहर के स्थानीय लोगों द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया और फूलों की पंखुड़ियों की बौछार की गई।

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