कांग्रेस विधायक एवं दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई के एक छात्र की मौत के मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराई जानी चाहिए, ताकि यह पता लग सके कि क्या यह हत्या, जातिगत भेदभाव या रैगिंग का मामला है।
अहमदाबाद निवासी दर्शन सोलंकी (18) के परिवार के सदस्यों से मिलने के बादमेवाणी ने कहा कि दलित समुदाय को संदेह है कि यह हत्या, जातिगत भेदभाव या रैगिंग का मामला है।
सोलंकी ने रविवार को कथित रूप से आईआईटी छात्रावास की इमारत की सातवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी।
गुजरात के कांग्रेस नेता ने कहा कि दलित समुदाय ने बीटेक (रसायन) पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष के छात्र सोलंकी के समर्थन में 19 फरवरी को देशव्यापी कैंडल मार्च निकालने का आह्वान किया है।
मुंबई पुलिस की एक टीम ने सोलंकी की मौत के सिलसिले में उसके परिवार के सदस्यों का बयान दर्ज करने के लिए बृहस्पतिवार को यहां उसके घर का दौरा किया।
मेवाणी ने कहा, दर्शन के पिता रमेश सोलंकी ने मुझे बताया कि जब वह शव लेने के लिए वहां गए तो उन्हें अपने मृत बेटे का चेहरा तक नहीं देखने दिया गया। उन्हें संस्थान द्वारा फोन पर अलग-अलग बातें बताई गईं और आईआईटी मुंबई के प्रोफेसरों ने अलग-अलग कहानियां सुनाईं। पूरा मामला संदिग्ध लगता है।
मेवाणी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में हस्तक्षेप करने, शोकसंतप्त परिवार के सदस्यों से मिलने और एसआईटी जांच का आदेश देने की भी अपील की।