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Shaurya Path: CDS Gen Anil Chauhan ने Space War की आशंका जता कर देश को क्या संदेश दिया है? अंतरिक्ष युद्ध के लिए आखिर कितना तैयार है भारत?

नमस्कार प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में आप सभी का स्वागत है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में देखें तो भले रूस और यूक्रेन आमने सामने की लड़ाई लड़ रहे हों लेकिन इस बात की संभावना भी बलवती होती जा रही है कि आने वाले युद्ध अंतरिक्ष में लड़े जाएंगे। साइबर वार इस समय अनेक मायनों में चल ही रही है और अब देशों को स्पेस वार के लिए भी तैयार रहना होगा। हरेक देश अपने अपने स्तर पर तैयारी कर भी रहे हैं और भारत भी इस दिशा में तेजी के साथ खुद को सक्षम बनाने में लगा हुआ है। यही कारण है कि हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष संघ के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने अंतरिक्ष के सैन्यीकरण की होड़ को रेखांकित किया। सीडीएस ने अंतरिक्ष क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक को शामिल करने पर विशेष जोर देने के साथ ही दोहरे उपयोग वाले मंच विकसित करने की वकालत भी की। सीडीएस जनरल चौहान ने भारतीय रक्षा अंतरिक्ष संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए कहा कि अंतरिक्ष के शस्त्रीकरण की दिशा में निरंतर होड़ से अंतरिक्ष में युद्ध की आशंका पैदा हो गई है। 
सीडीएस ने कहा, “अंतरिक्ष एक ऐसा क्षेत्र है जो भूमि, समुद्र, वायु और यहां तक कि साइबर सहित अन्य क्षेत्रों की क्षमताओं को बढ़ा रहा है। अंतरिक्ष का सैन्य उपयोग अहम विमर्श है जिससे हम अलग-थलग नहीं रह सकते हैं।” सीडीएस ने रूस और चीन के उपग्रह-रोधी परीक्षणों का जिक्र किया एवं अंतरिक्ष क्षेत्र में आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताओं के निर्माण के लिए भारत की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा और भविष्य की चुनौतियां को देखते हुए भारत को अपने प्रयासों को और व्यापक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘… हम सब का मकसद अत्याधुनिक तकनीक को शामिल करने पर विशेष ध्यान देने के साथ ही दोहरे उपयोग वाले मंच विकसित करने की ओर होना चाहिए।’’

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हम आपको यह भी बता दें कि एक दूसरे से ज्यादा ताकतवर बनने की होड़ अब धरती से आकाश तक पहुँच गयी है इसलिए हर देश अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाना चाहता है। अमेरिका ने रूस के इरादों को शायद पहले ही भांप लिया था तभी नासा ने एक वाणिज्यिक अंतरिक्ष स्टेशन के विकास की दिशा में काम शुरू कर दिया था। रूस भी आईएसएस से हटने के बाद अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। चीन भी अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बना रहा है। जहां तक भारत की बात है तो वह भी इस बात को समझ रहा है कि अगली चुनौती अंतरिक्ष से पैदा की जा सकती है इसलिए धरती की तरह आकाश में भी अपनी मजबूती की दिशा में देश तेजी से कदम बढ़ा रहा है। नरेंद्र मोदी सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया है जिससे भविष्य में इसके सकारात्मक परिणाम दिखेंगे। फिलहाल देश में सरकारी कंपनियों के अलावा अंतरिक्ष क्षेत्र में कम से कम 100 स्टार्टअप सक्रिय हैं जो उपग्रहों, प्रक्षेपण यानों और कक्षा में घूम रहे उपग्रहों के लिए ईंधन भरने वाले यान को डिजाइन कर रहे हैं।

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