मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख कमलनाथ ने शुक्रवार को एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पृथ्वीपुर और निवाड़ी विधानसभा सीटों के सरकारी अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी और अगले पांच वर्षों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करने की चुनौती दी। कमलनाथ ने स्थानीय अधिकारियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके कृत्यों के लिए किसी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने चुनौवी रैली में कहा कि मैं पृथ्वीपुर और निवाड़ी के प्रशासन से कहना चाहता हूं कि आप क्या कर रहे हैं मुझे सुनने को मिल रहा है कि पुलिस प्रशासन और अन्य लोग कैसे परेशान कर रहे हैं। ध्यान से सुनो परसों आएगा। आप (लोग) और मैं तय करेंगे कि उनसे कैसे निपटना है और किसी को बख्शा नहीं जाएगा, छह दिन बचे हैं, जो करना है कर लो लेकिन आपको आगे पांच साल बिताने हैं।
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कमलनाथ के ये कड़े शब्द कांग्रेस कार्यकर्ताओं की उन शिकायतों की पृष्ठभूमि में आए हैं, जिनमें कहा गया था कि उन्हें प्रशासन से ‘परेशानी’ मिल रही है। हालाँकि, यह पहली बार नहीं है कि मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम ने राज्य की नौकरशाही पर कड़ा प्रहार किया है। सितंबर 2023 में, उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि कोई भी सरकार स्थायी नहीं है और वह सागर जिले में “अत्याचार और उत्पीड़न” का हिसाब लेंगे। उन्होंने कहा, “यहां आकर मैंने सुना कि यह क्षेत्र यातना और उत्पीड़न का केंद्र है। जो लोग इस यातना में शामिल हैं, जिनमें सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं, उन्हें सुनना चाहिए कि वहां हमेशा परसों भी आता है।”
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने धनबल का इस्तेमाल कर मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार को गिरा दिया था। वर्ष 2018 में विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता में आई कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति वफादार कई विधायकों के विद्रोह के बाद गिर गई थी। बागी विधायक भाजपा में शामिल में हो गए, जिससे मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज सिंह चौहान की वापसी का मार्ग प्रशस्त हो गया। बड़वानी के राजपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, ‘‘हमने पिछले विधानसभा चुनाव में कृषि ऋण माफ करने का वादा किया था। हमने 25 लाख किसानों का कर्ज माफ किया लेकिन भाजपा और उनके बड़े उद्योगपति मित्रों ने विधायकों को पैसा देकर आपकी सरकार छीन ली।’’ भाजपा की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल आदिवासियों को ‘वनवासी’ कहता है, जबकि सही शब्द आदिवासी या मूल निवासी है, जिसका उपयोग कांग्रेस करती है।