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Kutch के ‘बन्नी’ का बजा डंका, Chhari-Dhandh को मिला Ramsar Site का दर्जा, Gujarat को गौरव।

बन्नी का अनमोल रत्न छारी-धंध आधिकारिक तौर पर रामसर साइट घोषित कर दिया गया है। यह गुजरात का पांचवां और कच्छ का पहला अंतरराष्ट्रीय महत्व का आर्द्रभूमि स्थल है। कच्छ जिले के छारी-धंध पक्षी अभयारण्य के शामिल होने से गुजरात में रामसर साइटों की कुल संख्या बढ़कर पांच हो गई है। इस संबंध में और अधिक जानकारी देते हुए वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने एक विज्ञप्ति में कहा कि छारी-धंध पक्षी अभयारण्य को रामसर साइट का दर्जा मिलने से पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, स्थानीय विकास और वैश्विक मान्यता के क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आएंगे।
उन्होंने कहा कि गुजरात हमेशा से आर्द्रभूमि संरक्षण और प्रबंधन में अग्रणी रहा है। देश के कुल आर्द्रभूमि क्षेत्र का 21 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गुजरात में स्थित है, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक है। गुजरात की आर्द्रभूमि लगभग 35 लाख हेक्टेयर में फैली हुई है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 17.8 प्रतिशत है। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और आर्द्रभूमि प्रबंधन के लिए निरंतर प्रयासरत है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य में कई आर्द्रभूमि आधारित संरक्षित क्षेत्र हैं, जैसे समुद्री राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य, खिजड़िया अभयारण्य, नलसरोवर अभयारण्य, छारी ढांध, कच्छ का छोटा रण-वन्य गधा अभयारण्य और पोरबंदर पक्षी अभयारण्य।
गांधीनगर स्थित गिर फाउंडेशन गुजरात में आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति का आकलन करने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, निगरानी कार्यक्रमों और आर्द्रभूमि अनुसंधान एवं प्रलेखन में सक्रिय रूप से संलग्न है। उन्होंने कहा कि कच्छ में पर्यावरण-पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण में एक नया मील का पत्थर जुड़ गया है। एशिया के सबसे बड़े घास के मैदान माने जाने वाले बन्नी क्षेत्र के किनारे स्थित छारी-धंध संरक्षण अभ्यारण्य को आधिकारिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि और रामसर स्थल घोषित किया गया है।

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