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मंत्री के शब्द उचित नहीं, केंद्रीय भाजपा नेतृत्व ने भी इसका संज्ञान लिया होगा : Trivendra Singh Rawat

देहरादून । उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार से भाजपा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि हाल में राज्य विधानसभा में मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल द्वारा बोले गए शब्दों को कतई उचित नहीं ठहराया जा सकता और उनकी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने भी निश्चित रूप से इसका संज्ञान लिया होगा। इस संबंध में सोशल मीडिया पर आए एक वीडियो में रावत ने कहा कि हालांकि, इसे केवल एक घटना के रूप में ही लेना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘ पहली बार इस तरह की घटना हुई है और पार्टी ने भी इसका संज्ञान लिया है। केंद्र ने भी निश्चित रूप से इसका संज्ञान लिया होगा या ले रहा होगा।’’
उन्होंने कहा कि इस घटना के लिए वह खुद को भी नहीं समझा पा रहे हैं कि यह कितना उचित था या इसकी किन शब्दों में निंदा या भर्त्सना की जाए या इसके लिए माफी मांगी जाए। लोकसभा सांसद ने कहा, ‘‘वह मेरे संसदीय क्षेत्र के एक सम्मानित मंत्री हैं और उन्होंने जो भी कहा, मैं उसको उचित नहीं मानता।’’ रावत ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में हुई एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कोविड—19 से पीड़ित होने के कारण जब वह दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती थे, उस दौरान उनकी ही पार्टी के एक विधायक ने एक महिला विधायक के लिए कुछ ऐसे शब्द कहे थे जो उन्हें उचित नहीं लगे।
उन्होंने कहा, ‘‘तब मैंने खुद एक ट्वीट किया था और कहा था कि जिस प्रकार से एक महिला के लिए बोला गया, वह उचित नहीं है और मैं उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूं।’’ हाल में राज्य विधानसभा में बजट सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक मदन बिष्ट की उन्हें लेकर की गयी टिप्पणी पर संसदीय कार्य मंत्री अग्रवाल भड़क गए थे और उन्होंने कहा था ‘‘ क्या हमने इसी दिन के लिए आंदोलन कर उत्तराखंड मांगा था कि पहाड़ी और देसी (मैदानी) को लेकर टिप्पणियां की जाएं।’’
इस दौरान उनके मुंह से एक अपशब्द भी निकल गया था। मंत्री के बयान को लेकर प्रदेश में सियासी पारा गर्म हो गया और कांग्रेस तथा कुछ अन्य संगठनों ने उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर निकाले जाने की मांग करते हुए उनके पुतले फूंके। इसके बाद मंत्री ने अपने बयान के लिए खेद भी जताया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और प्रदेश महामंत्री, (संगठन) अजेय कुमार ने भी अग्रवाल को तलब किया और उन्हें सार्वजनिक जीवन में संयम बरतने और उचित शब्दावली का प्रयोग करने की कड़ी हिदायत दी।
सांसद ने राज्य विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण द्वारा कांग्रेस विधायकों को इस विषय पर बोलने न देने और उनके इस व्यवहार को उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी के व्यवहार के विपरीत बताए जाने के बारे में कहा कि यह अपना—अपना नजरिया है। उन्होंने कहा कि अदालत में भी देखा गया है कि पिता के फैसलों को पुत्र ने बदल दिया। उन्होंने कहा कि खंडूरी की उत्तराखंड की संस्कृति के प्रति सोच और उनका काम करने का तरीका बहुत ही प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि वह उनके मंत्रिमंडल का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ जब भी ऐसे विषय सामने आते थे तो वह कहते थे कि यह देवभूमि है, हमारा आचरण और हमारा कर्म यहां की प्रकृति और संस्कृति के अनुरूप होना चाहिए।

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