ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने वक्फ (संशोधन) विधेयक पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार जो वक्फ (संशोधन) विधेयक ला रही है, उसने पहले ही अपनी मंशा जाहिर कर दी थी। जेपीसी ने सभी पक्षों को बहुत धैर्य से सुना है और सरकार को रिपोर्ट भेजी है। उम्मीद है कि जो विधेयक आएगा, वह अच्छा होगा। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि मौजूदा वक्फ अधिनियम में बदलाव की जरूरत है और इससे किसी को डरने की जरूरत नहीं है। हमें सिर्फ सरकारी बयानों पर ही विश्वास करना चाहिए। भावनाओं को भड़काने की कोशिश की जा रही है, जो गलत है।
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दूसरी ओर केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल (केसीबीसी) द्वारा केरल के सभी सांसदों से वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन करने का अनुरोध किया गया है। इस पर भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कहा, “वक्फ संशोधन विधेयक पर केसीबीसी (केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल) का समर्थन उन ‘भड़काऊ भाईजान’ समिति के सदस्यों के लिए एक मजबूत प्रतिक्रिया के रूप में आ रहा है, जो वक्फ का उपयोग करके ध्रुवीकरण करने और मुस्लिम समुदाय को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। यह कभी भी अल्पसंख्यक बनाम बहुसंख्यक का मुद्दा नहीं था।
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उन्होंने कहा कि वक्फ को दी गई असीमित शक्तियों ने ईसाई समुदाय तक की भूमि हड़पने को बढ़ावा दिया है… आज, यह भूमि हड़पने वालों और गरीब मुसलमानों के बीच का मुद्दा है, लेकिन जो लोग इसे हिंदू बनाम मुस्लिम या बहुसंख्यक बनाम अल्पसंख्यक बना रहे हैं, उन्हें केसीबीसी से करारा तमाचा मिला है। वक्फ संशोधन विधेयक पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक संविधान पर सीधा हमला है और इसकी बुनियाद के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि हर विपक्षी दल इसका विरोध कर रहा है, लेकिन सवाल यह है कि ‘धर्मनिरपेक्ष’ पार्टियों जेडी(यू) और टीडीपी का क्या कहना है? उन्होंने कहा कि यह पहली बार था कि समिति में खंड-दर-खंड चर्चा की गई। अगर वे इसे लागू करते हैं, तो हम लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध करेंगे।