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संसद की सुरक्षा में चूक को लेकर विपक्ष का हंगामा जारी, राज्यसभा चार बजे तक के लिए स्थगित

संसद की सुरक्षा में चूक मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर सोमवार को भी राज्यसभा की कार्यवाही बाधित हुई। इन मुद्दों पर विपक्षी दलों के हंगामे के कारण उच्च सदन की कार्यवाही दो बार के स्थगन के बाद अपराह्न चार बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
हंगामे की वजह से उच्च सदन में शून्य काल और प्रश्न काल नहीं हो सके। हालांकि, भोजनावकाश के बाद हंगामे के बीच ही सदन ने जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने के प्रावधान वाले दो अहम विधेयकों को मंजूरी प्रदान कर दी।
राज्यसभा ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2023 और संघ राज्य क्षेत्र शासन (सशोधन) विधेयक, 2023 को संक्षिप्त चर्चा के बाद ध्वनिमत से मंजूरी दी।

लोकसभा ने पिछले दिनों इन विधेयकों को मंजूरी दी थी।
दो बार के स्थगन के बाद उच्च सदन की कार्यवाही जब दोपहर दो बजे आरंभ हुई तो गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने दोनों विधेयकों को चर्चा एवं पारित करने के लिए सदन में पेश किया।
सभापति जगदीप धनखड़ ने विधेयकों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ये महिलाओं के लिए आरक्षण एवं उनके सशक्तीकरण से जुड़े हैं।
चर्चा में अधिकतर सदस्यों ने विधेयकों के प्रावधानों का स्वागत किया और कहा कि इससे महिलाएं अधिकार संपन्न होंगी। वहीं कुछ सदस्यों ने जम्मू कश्मीर में जल्दी चुनाव कराए जाने की मांग की।
विधेयकों के पारित होने के बाद धनखड़ ने कहा कि सुरक्षा में चूक सामूहिक चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं।

यह सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि यह प्रतिष्ठित संस्थान सबसे सुरक्षित और सबसे अनुकूल वातावरण में काम करे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘घटना की गहराई से जांच करने और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कार्य योजना तैयार करने की खातिर लोकसभा अध्यक्ष ने पहले ही एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है। इसके निष्कर्षों को उचित समय पर सदन के साथ साझा किया जाएगा।’’
हंगामा जारी रहने पर धनखड़ ने कहा कि वह ‘असहाय स्थिति’ में हैं और उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे उनसे उनके कक्ष में मुलाकात करेंगे। सभापति ने विपक्षी सदस्यों के आचरण पर आपत्ति जताई और इस बात पर भी अफसोस जताया कि उनके बार-बार बुलाने के बावजूद नेता प्रतिपक्ष उनसे मिलने उनके कक्ष में नहीं आए।

इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही चार बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले उन्होंने एक बार फिर नेता प्रतिपक्ष को अपने कक्ष में मिलने को कहा।
पहली बार के स्थगन के बाद 11.30 बजे जैसे ही सदन की बैठक आरंभ हुई सभापति धनखड़ ने श्रीलंका से आए संसदीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और उसके बाद भारतीय जनता पार्टी की सदस्य कांता कर्दम को शून्य काल के तहत अपने मुद्दे उठाने को कहा।
इसी समय विपक्षी सदस्यों का हंगामा और शोरगुल आरंभ हो गया।
हंगामे के बीच ही कर्दम ने कर्नाटक के बेलगावी में एक महिला को निर्वस्त्र कर घुमाने का मुद्दा उठाया।
इस दौरान, धनखड़ ने हंगामा कर रहे सदस्यों से सदन में व्यवस्था बनाने की अपील की। उन्होंने कांग्रेस की जेबी माथेर हिशम और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के बिनय विस्वम को उनके व्यवहार के लिए चेतावनी भी दी।
सदन में हंगामा बढ़ता देख धनखड़ ने कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

इससे पहले, सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही आरंभ होते ही धनखड़ ने कुवैत के शासक अमीर शेख नवाफ अल-अहमद अल-जबर अल-सबा के निधन का उल्लेख किया और उसके बाद पूरे सदन ने कुछ क्षण मौन रख उन्हें श्रद्धांजलि दी।
सभापति ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए और बताया कि उन्हें नियम 267 के तहत चर्चा कराने के लिए कुल 22 नोटिस मिले हैं लेकिन उन्होंने उन नोटिस को अस्वीकार कर दिया है। विपक्षी सदस्यों ने इसका विरोध किया और आसन से आग्रह किया कि इस मुद्दे पर विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने का अवसर दिया जाए।
विपक्ष के कुछ सदस्यों ने सभापति से आग्रह किया कि जिन नोटिस को उन्होंने अस्वीकार कर दिया है, कम से कम उसकी विषय वस्तु का उल्लेख करें।
कांग्रेस के के सी वेणुगोपाल, जयराम रमेश और राजीव शुक्ला ने कहा कि संसद की सुरक्षा में हुई चूक के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन के बाहर बयान दे रहे हैं लेकिन विपक्षी सदस्यों को इस मुद्दे को सदन में उठाने नहीं दिया जा रहा है।

हालांकि, सभापति ने उनकी मांग खारिज करते हुए शून्य काल आरंभ कराया और इसके लिए पहले भाजपा की कांता कर्दम और फिर कांग्रेस के प्रमोद तिवारी का नाम पुकारा। कर्दम उस वक्त अपने स्थान पर नहीं थीं।
तिवारी ने कहा कि वह महत्वपूर्ण मुद्दा उठाना चाहते हैं लेकिन पहले विपक्ष के नेता खरगे को बोलने का मौका दिया जाए।
सभापति ने जब खरगे को बोलने का मौका नहीं दिया तो विपक्षी सदस्य हंगामा और नारेबाजी करने लगे।
इसी दौरान, धनखड़ ने कुछ विपक्षी सदस्यों के आचरण पर आपत्ति जताई। कुछ विपक्षी सदस्यों के हाथों में ‘प्ले कार्ड’ भी देखा गया। इसके तत्काल बाद सभापति ने सदन की कार्यवाही 11.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

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