राजस्थान में कांग्रेस के अंदर सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच सालों से जारी तकरार पर अब शायद अंतिम फैसले का वक्त आ गया है। माना जा रहा है कि कर्नाटक चुनाव परिणाम के बाद पार्टी नेतृत्व इसे लेकर कोई कड़ा फैसला ले सकता है। वहीं कांग्रेस नेता सचिन पायलट भ्रष्टाचार और अन्य मुद्दों को लेकर अजमेर से जयपुर तक ‘जन संघर्ष यात्रा’ कर रहे हैं। सचिन पायलट ने 11 मई को पार्टी के रुख से अलग जाकर जन संघर्ष पदयात्रा की शुरुआत की। उनके इस कदम के बाद दिल्ली में कांग्रेस की 12 मई को बैठक हुई। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ये यात्रा भ्रष्टाचार के खिलाफ, नौजवानों के हित में है। मैंने जो कहा उसपर कार्रवाई करनी चाहिए। कांग्रेस हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ रही है। हमारा मुद्दा व्यक्तिगत नहीं है, मैं जनता की आवाज को उठा रहा हूं… कर्नाटक में कांग्रेस भारी बहुमत से जीतेगी।
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नजर रख रहे हैं
राजस्थान के पूर्व सीएम सचिन पायलट और मुख्यमंत्री आशिक गहलोत के बीच बढ़ती दरार के बीच एआईसीसी में कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सह-प्रभारी और पीसीसी प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा के साथ बैठक की। बैठक के बाद रंधावा ने कहा कि सचिन पायलट द्वारा आयोजित जन संघर्ष यात्रा उनका निजी कार्यक्रम है और पार्टी उस पर नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कोई फैसला पार्टी अध्यक्ष के कर्नाटक से लौटने के बाद ही लिया जाएगा।
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सचिन पायलट की यात्रा के मायने
सचिन पायलट के कदम को अशोक गहलोत और कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। पायलट लगातार कह रहे हैं कि गहलोत ने वसुंधरा राजे की सरकार के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ पिछले चार साल में कोई कार्रवाई नहीं की है। अब पार्टी नेतृत्व का फैसला क्या होगा, इस बारे में अभी कोई अंदाजा तो नहीं मिल पाया है, लेकिन संकेतों कुछ इस तरह का इशारा कर रहे हैं कि इससे अशोक गहलोत की कुर्सी को कोई खतरा नहीं है और विधानसभा चुनाव उनके नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। वहीं, सचिन पायलट को एक अंतिम समझौता फार्म्युला दिया जा सकता है। अब वह इसे मानते हैं या नहीं, यह तो वक्त ही बताएगा। अभी तक इस बारे में भी जानकारी नहीं मिली है कि उन्हें क्या फार्म्युला दिया जाएगा और क्या वह अशोक गहलोत को मंजूर होगा ?