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डिहाइड्रेटेड Sonam Wangchuk का Safdarjung Hospital में इलाज से इनकार, अपनी मांगों पर अड़े activist

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक, जिन्हें 20 दिन की भूख हड़ताल के बाद शनिवार को पुलिस ने दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में भर्ती कराया था, इलाज कराने से मना कर रहे हैं। सफदरजंग हॉस्पिटल की ओर से शनिवार दोपहर जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि वांगचुक ने नसों के ज़रिए दिए जाने वाले फ़्लूइड (IV फ़्लूइड) और डॉक्टरों की सलाह पर दी जाने वाली किसी भी अन्य दवा को लेने से इनकार कर दिया है। हॉस्पिटल ने कहा कि हालांकि उन्हें IV फ़्लूइड लेने की सलाह दी गई थी, लेकिन मरीज़ ने सभी तरह के IV फ़्लूइड, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) और किसी भी अन्य दवा को लेने से मना कर दिया है।
 

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बयान में आगे कहा गया है कि उनकी सेहत को ध्यान में रखते हुए उन पर लगातार नज़र रखी जा रही है और उन्हें इलाज कराने के लिए समझाया-बुझाया जा रहा है। सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस 18/7/2026 को सुबह 7:40 बजे VMMC और सफदरजंग अस्पताल लेकर आई और उन्हें भर्ती किया गया। उन्हें 20 दिनों तक ठोस भोजन न करने और पूरे शरीर में कमजोरी की वजह से भर्ती किया गया था। उन्हें बेहोश होने की कोई समस्या नहीं रही है। भर्ती होने के समय वे होश में थे और उनकी पल्स, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन सैचुरेशन स्थिर थे। उनमें डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के लक्षण दिखे।
सफदरजंग हॉस्पिटल ने बताया कि ब्लड गैस एनालिसिस से पता चला कि उन्हें ‘कम्पन्सेटेड एसिडोसिस’ था, सीरम पोटैशियम कम था और ब्लड शुगर 78 mg/dl था। दोबारा जांच में भी सीरम पोटैशियम का स्तर वैसा ही पाया गया। भर्ती होने के समय यूरिनरी कीटोन 1+ थे, जो दोपहर 1:00 बजे तक बढ़कर 3+ हो गए। हालांकि उन्हें इंट्रावेनस (IV) फ्लूइड देने की सलाह दी गई थी, लेकिन मरीज़ ने IV फ्लूइड, ओरल रिहाइड्रेशन फ्लूइड या कोई भी अन्य दवा लेने से इनकार कर दिया है। उनकी लगातार निगरानी की जा रही है और उनके स्वास्थ्य के हित में इलाज के लिए उन्हें समझाया-बुझाया जा रहा है।
 

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NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर वे पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। पुलिस की यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश के दो दिन बाद हुई, जिसमें कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से एक्टिविस्ट की जान बचाने के लिए “हर संभव कदम उठाने” को कहा था। कोर्ट ने उनकी सेहत पर लगातार नज़र रखने का भी निर्देश दिया था। भूख हड़ताल के दौरान वांगचुक का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने गुरुवार को बताया था कि उपवास के दौरान उनका वज़न 9 किलो कम हो गया है और उनके ज़रूरी अंगों को ख़तरा हो सकता है। पुलिस ने शनिवार को कहा कि उन्होंने हाई कोर्ट के निर्देश और डॉक्टरी सलाह के अनुसार वांगचुक को वहां से हटाया।
 
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