छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में मंगलवार को नारायणपुर जिले के हजारों मतदाताओं के साथ सुमित्रा साहू ने भी मतदान किया। सुमित्रा वह महिला है जो कभी लोकतंत्र के खिलाफ लड़ती थी लेकिन आज वह लोकतंत्र की सुरक्षा में तैनात है।
छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मंगलवार को मतदान हुआ। मतदान में 20 विधानसभा क्षेत्रों के कुल 40,78,681 मतदाताओं में से 71.11 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकारों का प्रयोग किया।
इन सीटों पर अपने मताधिकार का प्रयोग करने वाली हजारों महिलाओं में से एक सुमित्रा भी है। सुमित्रा ने नारायणपुर निर्वाचन क्षेत्र में अपना वोट डाला। वह 2018 में नक्सलवाद छोड़कर पुलिस में शामिल हुई है।
सुमित्रा (34) ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि वह नारायणपुर में माओवादियों की आमदई एरिया कमेटी में कमांडर के रूप में सक्रिय थी और दिसंबर 2018 में उन्होंने नक्सली संगठन छोड़ दिया था।
सुमित्रा ने कहा, ‘‘मैं जनवरी 2019 में पुलिस बल में शामिल हुई। मुझे खुशी है कि मैंने पहली बार वोट दिया।’’
नारायणपुर जिले के कड़ेनार गांव की निवासी सुमित्रा साहू 2004 में माओवादियों की सांस्कृतिक शाखा चेतना नाट्य मंडली के सदस्य के रूप में नक्सलवाद में शामिल हुई थी। उसे तत्कालीन पूर्वी बस्तर डिवीजन सचिव उर्मिला ने नक्सल आंदोलन में भर्ती किया था।
नक्सल आंदोलन से जुड़ने के बाद सुमित्रा को संसदीय, विधानसभा और पंचायत चुनावों के दौरान माओवादियों द्वारा किए गए बहिष्कार के आह्वान का प्रचार करने का काम सौंपा जाता था। वह सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से माओवादी विचारों का प्रचार करती थी।
बाद में उसे माओवादियों की आमदई एरिया कमेटी में कमांडर का पद मिला।
सुमित्रा ने बताया, अपने छह-सात सहयोगियों के पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे जाने और कड़ेनार गांव में पुलिस शिविर स्थापित होने के बाद दिसंबर 2018 में मैंने नक्सलवाद छोड़ दिया और 2019 में पुलिस में शामिल हो गई।
शुरुआत में मैंने गोपनीय सैनिक (गुप्त सैनिक) के रूप में कार्य किया और बाद में आरक्षक के रूप में पदोन्नत हुई।
सुमित्रा ने आज पहली बार मतदान किया। लोकतंत्र के इस पर्व में शामिल होने को लेकर सुमित्रा उत्साहित थी। उन्होंने कहा, यह गर्व का क्षण है। कभी लोकतंत्र के खिलाफ हथियार उठाया अब सुरक्षा बल में शामिल होकर लोकतंत्र की सुरक्षा में तैनात हूं।
छत्तीसगढ़ की 20 विधानसभा सीटों में मंगलवार को पुलिस और अर्धसैनिक बलों की कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान कराया गया, जहां 71.11 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। पहले चरण में 25 महिला उम्मीदवारों समेत 223 उम्मीदवार हैं।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 12 विधानसभा क्षेत्रों वाले बस्तर संभाग में शांतिपूर्ण मतदान के लिए लगभग 60 हजार जवानों को तैनात किया गया। जिनमें से 40 हजार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के और 20 हजार राज्य पुलिस के जवान हैं।
उन्होंने बताया कि पहले चरण के मतदान के लिए लगभग एक लाख सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए।
राज्य में नक्सलियों ने चुनाव के बहिष्कार की घोषणा की है। इस दौरान उन्होंने उत्पात मचाने की भी कोशिश की।
सुकमा जिले के चिंतागुफा थाना क्षेत्र में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में चार सुरक्षाकर्मी घायल हो गए, तथा जिले के टोंडामरका शिविर के करीब नक्सलियों द्वारा किए गए बारूदी सुरंग विस्फोट में सीआरपीएफ का एक कमांडो घायल हो गया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नारायणपुर, बीजापुर और कांकेर जिलों में नक्सलियों और सुरक्षाबलों के बीच गोलीबारी भी हुई। इन घटनाओं में सुरक्षाबलों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
राज्य की 90 सदस्यीय विधानसभा की शेष 70 सीटों पर दूसरे चरण में 17 नवंबर को मतदान होगा। तीन दिसंबर को वोटों की गिनती की जाएगी।