एआई क्या क्या कर देगा ये बताने में एआई से ज्यादा लोग इस काम में लगे हुए हैं। कोई इसे एकदम क्रांतिकारी बता रहा है तो कोई सबकुछ खत्म हो जाने के दावे भी कर रहा है। एआई अगर इतना ही इंटेलिजेंस है तो इसके आगे लगा आर्टिफिशियल हटाया जा सकता है क्या? किसी भी टेक्नोलॉजी से दुनिया में कुछ बदलाव आना कॉमन है और एआई से भी ऐसा ही होगा। आए दिन कोई लेख छप जाता है कि एआई से नौकरी खत्म हो जाएगी।
एआई नौकरियां खत्म कर देगा
एक्सपर्ट्स ने बड़े पैमाने पर एआई से नौकरियां जाने की आशंका जताई है। आईटी इंडस्ट्री की संस्थान नॉसकाम के चेयरमैन राजेश नांबियार ने चिंता जताई है कि इससे सबसे बड़ा खतरा बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग यानी बीपीओ सेक्टर पर है। फोरम ने 2025 के लिए अपनी जॉब रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया है कि आने वाले समय में एआई का 22 परसेंट नौकरियों पर असर पड़ेगा। कुछ नौकरियां तो मार्केट से बिल्कुल गायब हो जाएंगी। कैशियर, टिकट क्लर्क और एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट जैसे क्लेरिकल और सेक्रेटेरियल पोस्ट पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। मैनुअल टास्क पर बेस्ड इन नौकरियों की जगह एआई, रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन (RPA) और सेल्फ-सर्विस सिस्टम ले लेंगी।
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टेक्नोलॉजी नौकरी नहीं लेती, PM मोदी ने समझाया
दूसरी ओर ये भी बताया गया है कि एआई की वजह से करीब 78 मिलियन नई नौकरियां भी क्रिएट होंगी। जो पहले से मौजूद 92 मिलियन नौकरियों की जगह 170 मिलियन नए पोस्ट क्रिएट कर जॉब मार्केट को बैलेंस करेगा। प्रधानमंत्री ने भी इसका जिक्र किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)-संचालित भविष्य के लिए लोगों को कौशल प्रदान करने और फिर से कुशल बनाने में निवेश का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नौकरियों का नुकसान एआई का सबसे खतरनाक व्यवधान है। लेकिन, इतिहास गवाह है कि तकनीक के कारण काम ख़त्म नहीं होता। उसका स्वरूप बदलता है और नये प्रकार के रोजगार पैदा होते हैं। हमें एआई-संचालित भविष्य के लिए अपने लोगों को कुशल बनाने और पुनः कुशल बनाने में निवेश करने की आवश्यकता है।
एआई का बेहतर इस्तेमाल सीखने से बचेगी नौकरी!
सॉफ्टवेयर सर्विसेज इंडस्ट्री में काम करने वाले सभी लोगों को एआई का इस्तेमाल करना सीखना होगा। जो प्रोफेशनल्स एआई का बेहतर इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे उनकी जगह जल्द ही वो लोग ले लेंगे जिन्हें इसका अच्छे से इस्तेमाल करना आता होगा। यही वजह है कि ज्यादातर आईटी सर्विस देने वाली कंपनियां अपने कर्मचारियों को एआई में ट्रेन करने के लिए निवेश कर रही हैं। कंपनियों को पता है कि आगे चलकर अपने क्लाइंट्स की डिमांड को आसानी से पूरा करने के लिए एआई के बिना काम नहीं चल पाएगा। जेनरेटिव एआई व्हाइट कलर जॉब यानी ऑफिस वाली नौकरियों पर ज्यादा असर डालेगा। हर कंपनी तकनीक का इस्तेमाल करके अपनी लागत घटाने की कोशिश करेगी और इसके लिए नौकरियों को कम करना उनके लिए एक आसान विकल्प होगा।
हमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्यों चाहिए
मशीन से चलने वाली कारों में ड्राइवर की जरूरत खत्म करने के लिए मशीन को खुद ही सीखना होगा। उपलब्ध देता से बेहतर और ज्यादा सटीक नतीजे पाने के लिए इसका इस्तेमाल हो रहा है। जैसे गाड़ी चलाना एक जटिल काम है और यह डीप लर्निंग के जरिए ही संभव हो सकता है। डीप लर्निंग डेटा प्रोसेसिंग की एआई तकनीक है। यह मिलने वाले हर इनपुट को पहले की जानकारी से संबंध बिठाकर किस तरीके से स्टोर करती है जिससे एल्गोरिदम का कई चरणों वाला ढांचा बन जाता है। यही आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क होता है। नहीं जैसा हमारे दिमाग में न्यूरोनो का बायोलॉजिकल नेटवर्क होता है। यह न्यूरल नेटवर्क क्रिएटिव चीजें कर सकता है। मशीन जब इंसानी भाषा में बात कर रही है तो चुनौतियां और भी बढ़ गई है।