Breaking News

बच्चे… कितने अच्छे! भारत की आबादी कौन बढ़ा रहा है, क्या मोदी सरकार लाएगी नया कानून?

हम में से शायद ही कोई होगा जिसने जनसंख्या पर निबंध न लिखा हो। उन सारे निबंधों में हमने यही लिखा कि जनसंख्या का बढ़ना एक चुनौती है और इस चुनौती से निपटने के लिए परिवार नियोजन आवश्यक है। ऐसे प्रोग्राम भी आते थे जिसमें परिवार नियोजन की सीख दी जाती थी। इस प्रयास का एक ही लक्ष्य होता था कि बढ़ती जनसंख्या को किसी तरह से काबू किया जाए। एक और खास बात ये है कि वो हिन्दुस्तान ही है जहां शादी होती है तो सबसे शाश्वत सवाल कि खुशखबरी कब सुना रहे हो।  11 जुलाई यानी आज ही के दिन जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। जनसंख्या दिवस के साथ ही बहस तेज हो गई है कि देश की आबादी कौन बढ़ा रहा है? क्या कोई जानबूझकर जनसंख्या बढ़ा रहा है। क्या ज्यादा बच्चों के पीछे कोई खास किस्म का इरादा तो नहीं है। जनसंख्या दिवस के बीच आरएसएस ने ये डिबेट शुरू की है। मुखपत्र आर्गनाइजर ने ये मुद्दा उठाया है। वर्ल्ड पापुलेशन डे डीलिंग विथ द डिमोग्राफिक डाइलिमा नाम से एक लंबा लेख लिखा गया है। 

इसे भी पढ़ें: World Population Day 2024: हर साल 11 जुलाई को मनाया जाता है विश्व जनसंख्या दिवस, जानिए इतिहास

जनसंख्या पर आरएसएस की रिपोर्ट क्या कहती है? 
बढ़ती मुस्लिम आबादी पर आरएसएस का विचार पहले से ज्यादा आक्रमक दिखा। इस लेख में टीएमसी के नेता जेसीबी के शरिया सजा और ममता बनर्जी की प्रो मुस्लिम राजनीति का भी जिक्र किया गया है। बंगाल के भविष्य का इस्लामिक स्टेट बताया गया है। इसके साथ ही इंडिया अलायंस का भी जिक्र है। कहा गया कि बढ़ती मुस्लिम आबादी पर इंडिया अलायंस चुप ही रहेगा। इंडिया अलायंस को पता है कि इसी में उसकी संसद की सीटें बढ़ने की गारंटी है। दिल्ली के शाहीन बाग का जिक्र करते हुए लिखा गया कि बदलती डेमोग्राफी से भविष्य में कई शाहीन बाग दिखाई दे सकते हैं। 
आरएसएस के आर्टिकल के निष्कर्ष को कुछ प्लाइंट में समझें
देश के बॉर्डर एरिया में बड़ी तेजी के साथ मुस्लिम आबादी बढ़ी है। 
राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या स्थिर है, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों में नहीं है।
बंगाल, बिहार, असम, उत्तराखंड में मुस्लिमों की बढोतरी अप्राकृतिक है।
जनसंख्या असंतुलन से सामाजिक सियासी संघर्ष के खतरे हैं। 
लोकतंत्र में नंबर से फैसले होते हैं और इसलिए सतर्कता जरूरी है।
जनसंख्या असंतुलन को रोकने के लिए समग्र नीति की भी जरूरत है। 

इसे भी पढ़ें: 1 बच्चे का नियम भारत में भी होगा लागू? ऑस्ट्रिया से लौटते ही क्या बड़ा खेल करने वाले हैं मोदी

पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद की स्टडी में क्या कहा गया
आबादी पर बहस 2024 के चुनाव में छिड़ी थी जब प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की एक स्टडी आई थी। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि 1950 से 2015 के बीच हिंदुओं की  आबादी में हिस्सेदारी 7.8 फीसदी घट गई। 1950 में जो आबादी 84.68 प्रतिशत थी वो 2015 में 78.06 प्रतिशत रह गई। आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी 43.15 प्रतिशत बढ़ गई। 

Loading

Back
Messenger