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आतंकवादियों के निशाने पर क्यों रहता है Sunjwan Army Camp? क्या आसपास बसे Rohingya Muslims ही खड़ी कर रहे हैं परेशानी?

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के दौरान लोगों के बीच दहशत फैलाने के लिए आतंकवादी एक बार फिर सक्रिय हो गये हैं। हम आपको बता दें कि जम्मू में आज सुंजवान सैन्य शिविर की संतरी चौकी पर आतंकवादियों द्वारा की गई गोलीबारी में सेना का एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। यह वही सुंजवान सैन्य शिविर है जहां पहले भी आतंकवादी हमले हो चुके हैं। हम आपको याद दिला दें कि साल 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जम्मू-कश्मीर दौरे से पहले सुंजवां में सेना के एक शिविर के निकट आतंकवादियों ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के कर्मियों को ले जा रही बस पर हमला कर दिया था जिसमें एक जवान शहीद हो गया था। इस दौरान हुई मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गये थे और 9 सुरक्षा कर्मी घायल हो गये थे। उस समय आतंकवादियों ने प्रधानमंत्री की जम्मू-कश्मीर यात्रा को विफल करने के लिए ‘बड़ी साजिश’ की थी और अब राज्य विधानसभा चुनावों से पहले माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
हम आपको यह भी याद दिला दें कि फरवरी 2018 में भी आतंकवादियों ने सुंजवान सैन्य शिविर पर हमला किया था। इस घटना में तीन सैनिक शहीद हो गए थे और एक नागरिक की मौत हो गई थी। वहीं उस घटना में तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया था। यहां सवाल उठता है कि जब सुंजवान सैन्य शिविर आतंकवादियों के निशाने पर अक्सर रहता है तो वहां सुरक्षा को लेकर अत्यधिक सतर्कता क्यों नहीं बरती जाती? सवाल यह भी उठता है कि जम्मू के बाहरी इलाके में स्थित सुंजवान सैन्य शिविर के आसपास रोहिंग्या मुसलमानों की बस्तियां क्यों बसने दी गयीं? यह जगजाहिर है कि रोहिंग्या मुसलमान जगह-जगह कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनते हैं इसलिए सवाल उठता है कि सैन्य शिविर जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के आसपास रोहिंग्याओं को किसने बसाया? हम आपको बता दें कि कुछ वर्ष पहले आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि जम्मू के बाहरी इलाके सुंजवान में रोहिंग्याओं के कई परिवार डेरा डाले हुए हैं। 10 फरवरी 2018 को जब आतंकवादियों के भारी हथियारों से लैस समूह ने सुंजवान सेना शिविर पर हमला किया था तब यह बात उभर कर आई थी कि आतंकवादियों को सेना शिविर के करीब रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों ने शरण दी होगी। इस रिपोर्ट के मुताबिक रोहिंग्या मुसलमान कई जिलों तक अपने पैर फैलाने में कामयाब रहे हैं। बताया जाता है कि रोहिंग्या जम्मू के अलावा कश्मीर घाटी के सांबा, डोडा, पुंछ और अनंतनाग में रह रहे हैं। इसलिए जरूरत इस बात की है कि रोहिंग्याओं को जम्मू-कश्मीर से बाहर खदेड़ा जाये। इसकी शुरुआत सैन्य और अन्य रक्षा-सुरक्षा प्रतिष्ठानों के निकट बने रोहिंग्या कैम्पों से की जा सकती है।

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जहां तक आज की घटना की बात है तो आपको बता दें कि रक्षा विभाग के प्रवक्ता ने बताया है कि सुबह करीब 10 बजकर 50 मिनट पर जम्मू के बाहरी इलाके में स्थित सुंजवान सैन्य स्टेशन पर कुछ राउंड गोलीबारी हुई। घटना में एक सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गया। प्रवक्ता ने संतरी चौकी पर गोलीबारी करने वाले हमलावरों के बारे में विस्तृत जानकारी दिए बगैर बताया कि हमलावारों को पकड़ने के लिए अभियान शुरू किया गया है और इस संबंध में आगे जानकारी दी जाएगी। इससे पहले अधिकारियों ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर की शीतकालीन राजधानी में सबसे बड़े सुरक्षा शिविरों में से एक की सुरक्षा में तैनात सेना की एक चौकी पर संदिग्ध आतंकवादियों ने कुछ राउंड गोलियां चलाईं, जिसके बाद कुछ देर के लिए गोलीबारी हुई। इस घटना से इलाके में दहशत फैल गई और फरार आतंकवादियों को पकड़ने के लिए स्थानीय पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने सेना के साथ मिलकर तलाश अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने कहा कि तलाश अभियान जारी है लेकिन आतंकवादियों से अब तक सामना नहीं हुआ है।

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