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भोपाल में इस्तीफा मंजूर करने की मांग को लेकर पैदल मार्च करने पर महिला डिप्टी कलेक्टर गिरफ्तार

मध्य प्रदेश में इस्तीफा स्वीकार करने की मांग को लेकर पैदल मार्च कर रहीं एक महिला डिप्टी कलेक्टर को शांति भंग करने के आरोप में भोपाल में गिरफ्तार कर लिया गया।
वह मांग कर रही थीं कि सरकारी सेवा से उनके इस्तीफे को सरकार स्वीकार कर ले क्योंकि वह आगामी विधानसभा चुनाव लड़ना चाहती हैं।
वह सरकार से ‘न्याय’ की मांग को लेकर पैदल मार्च करते हुए प्रदेश की राजधानी पहुंचीं थीं।
अधिकारी निशा बांगरे के नेतृत्व में पैदल मार्च 28 सितंबर को बैतूल जिले से शुरू हुआ और सोमवार शाम को भोपाल पहुंचा था।
एक पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि मार्च में शामिल लोग मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास की ओर जाने लगे जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
बांगरे के परिवार के एक सदस्य ने कहा कि छतरपुर जिले की डिप्टी कलेक्टर बांगरे ने इस साल जून में अपना त्यागपत्र दे दिया था, लेकिन अभी तक इसे प्रदेश सरकार ने स्वीकार नहीं किया है।

मध्य प्रदेश में 230 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव 17 नवंबर को होंगे और वोटों की गिनती तीन दिसंबर को होगी।
महिला अधिकारी की पैदल यात्रा सोमवार शाम को भोपाल पहुंची। पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘ जब उन्होंने डॉ. बीआर आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास की ओर मार्च करना शुरू किया, तो पुलिस ने मार्च रोक दिया और उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 151 (शांति भंग करने के लिए पांच या अधिक की सभा) का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
इस बीच, एक कांग्रेस नेता ने कहा कि जब बांगरे ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस का विरोध किया तो उनकी पोशाक फट गई। हालांकि, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त महावीर सिंह मुजाल्दे ने इस दावे का खंडन किया और कहा कि पूरा घटनाक्रम मीडिया के कैमरों में कैद है।

उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के बाद बांगरे को एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया, लेकिन उन्होंने जमानत लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
इस बीच, भोपाल केंद्रीय कारागार के अधिकारी सरोज मिश्रा ने कहा कि बांगरे को जेल के अंदर महिला वार्ड में रखा गया है।
क्या वह जेल के अंदर भूख हड़ताल कर रही हैं? इस सवाल के जवाब में अधिकारी ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर लिखित में कोई सूचना नहीं दी है।
बांगरे के पति सुरेश अग्रवाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग से आने वाली बांगरे ने अपने गृह नगर बैतूल के एक धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए छुट्टी नहीं मिलने के बाद सरकारी सेवा से इस्तीफा दे दिया।

उन्होंने कहा, वह बैतूल जिले के आमला से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहती हैं, लेकिन 22 जून के बाद से उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि जब कुछ नहीं हुआ तो उन्होंने 28 सितंबर को शांतिपूर्ण मार्च निकाला, जो सोमवार को भोपाल पहुंचा।
अग्रवाल ने कहा, हम शांतिपूर्वक मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बीच में ही गिरफ्तार कर लिया और फिलहाल वह जेल में हैं।
उन्होंने बताया कि बांगरे को जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा क्योंकि वह उन्हें जेल से बाहर निकालने के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं।

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