मालदीव की संसद में हंगामे के बाद मुख्य विपक्षी दल एमडीपी ने पीपुल्स डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी कर ली है। इसके साथ ही मुइज्जू को पद से भी हटाने की तैयारी है। लेकिन इन सब के बीच मुइज्जू के भाषण का भी विपक्षी दलों ने बॉयकाट किया है। ये कहीं न कहीं सीधे तौर पर ये बताता है कि भारत के साथ रहना होगा। इसके साथ ही मालदीव की जनता ये चाहती है कि इंडिया फर्स्ट की नीति पर ही मालदीव काम करे न की चीन के इशारे पर नाचे।
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मुइज्जू भारत विरोधी एजेंडे के साथ ही सरकार बनाते हुए नजर आए थे। लेकिन उनकी नई नवेली सरकार पर संकट गहराता जा रहा है। मुइज्जू की परेशानियां आने वाले दिनों में और बढ़ जाएंगी। मालदीव की जनता भी मुइज्जू के फैसलों के साथ खड़ी होती हुई दिखाई नहीं दे रही है। भारत हमेशा से मालदीव का सबसे शानदार दोस्त रहा है। हर संकट की घड़ी में मालदीव ने भारत की मदद की है। लेकिन चीन के इशारे पर मुइज्जू तमाम कदम उठाते नजर आए। चाहे वो भारत की सेना को वापस भेजने का मुद्दा हो। लेकिन मालदीव की जनता और विपक्षी दल भारत की अहमियत को भलि-भांति समझते हैं। इसलिए मुइज्जू के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध शुरू हो चुका है।
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जनवरी में ही खबर आई थी कि एमडीपी और एक अन्य विपक्षी दल डेमोक्रेट्स के पास मुइज्जू पर महाभियोग प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त हस्ताक्षर किए थे। मालदीव के संविधान में कहा गया है कि मजलिस के एक तिहाई सदस्य राष्ट्रपति को हटाने के प्रस्ताव को मंजूरी देते हैं। यह पहली बार नहीं है जब मुइज्जू को विपक्ष का गुस्सा झेलना पड़ा। चीन समर्थक नेता ने पदभार ग्रहण करने के बाद औपचारिक रूप से भारत से अपने सैन्य कर्मियों को उनके देश से वापस बुलाने का अनुरोध किया।