सुबह होती है, शाम होती है, उम्र इसी तरह तमाम होती है। वैसे तो ये फलसफां जिंदगी के लिए जाहिर किया गया है। लेकिन कुछ ऐसा ही हाल पाकिस्तान का भी है। पड़ोसी मुल्क में दिन होता है। रात होती है। लेकिन उम्मीद की कोई सुबह नहीं होती है। पाकिस्तान एक ऐसे फंंदे में फंस गया है कि अब उसके पास से उसमें से निकलने का रास्ता भी नहीं बचा है। पाकिस्तान की हर तरकीब फेल होती नजर आ रही है। वो अपने जिगरी चीन से लेकर खाड़ी देशों के आगे गिड़गिड़ा चुका है। आईएमएफ जैसे इंटरनेशनल संस्थाओं के आगे बेशर्मी से हाथ फैला रहा है, लेकिन आम पाकिस्तानियों को अब सहारा सिर्फ नरेंद्र मोदी से नजर आ रहा है। पाकिस्तान में एक बार फिर से जब महंगाई का बम फटा और टैक्स का सरकारी हंटर चला तो पाकिस्तानी पीएम मोदी को एकबार फिर याद करने लगे।
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दिवालिया होने की कगार पर पाकिस्तान
आम पाकिस्तानियों की थाली से आटा, दाल और प्याज जैसी चीजें पहले ही दूर होती जा रही हैं। माल ढुलाई और कल-कारखानों के लिए जरूरी तेल-बिजली और गैस महंगी होने से जिंदगी गुजारना और दूभर होगा। अनुमान है कि महंगाई जून तक 33% पर पहुंच सकती है। रही बात सरकार की तो उसका विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खाली हो चुका है। यानी चीजें आयात करने के लिए उसके पास पैसा नहीं है। डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया 275 पर पहुंच गया है, जो पिछले साल इन्हीं दिनों 175 के आसपास था।
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दाल-रोटी भी दूभर
पाकिस्तान में दूध की कीमत 210 रुपये/लीटर और चिकन 780 रुपये/ किलो बिक रहा है। पाकिस्तान के कई शहरों में आटा नहीं मिल रहा है। जहां मिल रहा है, वहां दाम 145 से 165 रुपये/किलो तक पहुंच गया है। जबकि भारत में आटा 30 से 40 रुपये प्रति किलो है।
आवाम पीएम मोदी को याद कर रही
पाकिस्तान के अंधकारमय भविष्य की आहट से जिन्ना के मुल्क में हाहाकार मचा है। भूख से बिलबिलाती और महंगाई की मार से छटपटाती पाकिस्तानी आवाम पीएम मोदी को याद कर रही है।