राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के साथ ही डोनाल्ड ट्रंप के फैसले लेने का सिलसिला शुरू हो गया। ट्रंप एक के बाद एक ताबड़तोड़ फैसले ले रहे हैं। जिसका पूरी दुनिया पर बराबर असर पड़ रहा है। ट्रंप ने सत्ता में आने से पहले ही कहा था कि वो यूएस एड को रोक देंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति ने ऐसा किया भी और जब बात दुनियाभर के देशों तक पहुंचने वाले फंडिंग को लेकर आई तो ट्रंप ने इसका खुला विरोध किया। भारत को लेकर एक सवाल के जवाब में डोनाल्ड ट्रंप ने जो कहा वो आप भी जानें। ट्रंप ने कहा कि हम भारत को 21 मिलियन डॉलर क्यों दे रहे हैं? मैं भारत औरउनके प्रधानमंत्री का बहुत सम्मान करता हूं। लेकिन हम भारत को मतदान बढ़ाने के लिए 21 मिलियन डॉलर क्यों दे रहे हैं? 19 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति पत्रकारों से बात कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारे हिसाब से भारत दुनिया में सबसे ज्यादा टैक्स लगाने वाले देशों में से एक है। उसकी अर्थव्यवस्था भी तेजी से बढ़ रही है। इसीलिए उसे 21 मिलियन डॉलर की क्या जरूरत है।
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निजी अमेरिकी वांतरिक्ष (एयरोस्पेस) और अंतरिक्ष परिवहन सेवा कंपनी स्पेस एक्सप्लोरेशन टेक्नोलॉजीज कॉरपोरेशन (स्पेसएक्स) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मस्क के नेतृत्व में 16 फरवरी को सरकारी कार्यदक्षता विभाग ने उन सभी मदों की सूची बनाई जिन पर अमेरिकी करदाताओं के पैसे खर्च किए जाएंगे। इस सूची में भारत में मतदान के दौरान मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 2.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर का अनुदान भी शामिल था।
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सरकारी कार्यदक्षता विभाग ने बताया कि इन सभी मदों को रद्द कर दिया गया है। इस सूची में बांग्लादेश में राजनीतिक परिदृश्य को मजबूत करने के लिए 2.9 करोड़ अमेरिकी डॉलर का आवंटन, साथ ही नेपाल में राजकोषीय संघवाद के लिए दो करोड़ अमेरिकी डॉलर और वहां जैव विविधता संरक्षण के लिए 1.9 करोड़ अमेरिकी डॉलर का आवंटन भी शामिल है, जिन्हें रद्द कर दिया गया है। अपने स्वामित्व वाले निजी रिजॉर्ट ‘मार-ए-लागो’ में मंगलवार को कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर करते हुए ट्रंप ने कहा कि भारत में मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 2.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता हम क्यों दे रहे हैं? उनके पास बहुत पैसा आता है। हमारे संदर्भ में भारत दुनिया में सबसे अधिक कर लगाने वाले देशों में से एक है। उनके शुल्क बहुत अधिक हैं। उन्होंने कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए, जिसमें संघीय सरकार द्वारा करदाताओं के पैसे की फिजूलखर्ची के बारे में आमूल-चूल पारदर्शिता की आवश्यकता वाले ज्ञापन शामिल थे।