जीन में बदलाव के साथ दुनिया के पहले शिशु के जन्म का दावा कर पांच साल पहले एक नैतिक बहस शुरू करने वाले चीनी वैज्ञानिक ने मंगलवार को कहा कि वह हांगकांग रवाना होंगे, जहां उन्हें उम्मीद है कि वह दुर्लभ वंशानुगत बीमारियों पर शोध कर पाएंगे।
वैज्ञानिक हे जियानकुइ ने 2018 में लोगों को उस वक्त चौंका दिया था, जब उन्होंने जुड़वा लड़कियों के भ्रूण के जीन में बदलाव करने की घोषणा की थी। वैज्ञानिक समुदाय में इस कार्य की कड़ी आलोचना की गई थी और इसे नैतिक मूल्यों के खिलाफ करार दिया गया था।
इसके बाद 2019 में जियानकुई को चीनी अदालत ने बिना लाइसेंस के अभ्यास करने का दोषी ठहराया था और तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी।
अपनी रिहाई के 10 महीने बाद जियानकुई ने मंगलवार को कहा कि उन्हें हांगकांग का वीजा मिला है और वह वहां कई विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और कंपनियों के संपर्क में हैं।
उन्होंने प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि यदि उचित अवसर मिला तो वह हांगकांग में काम करने पर विचार करेंगे।
वैज्ञानिक ने यह भी कहा कि उन्होंने दुर्लभ वंशानुगत बीमारियों के लिए जीन थेरेपी पर शोध करने की योजना बनाई है।