प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में इस सप्ताह हमने ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) से जानना चाहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध में अब जमीनी हालात क्या हैं और संघर्षविराम की क्या संभावना है? हमने अमेरिकी मीडिया की उस खबर के बारे में भी उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही जिसमें कहा गया है कि भारत ने रूस को तकनीक भेजकर उसकी मदद की। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि संघर्षविराम की जहां तक बात है तो इसमें अभी देरी नजर आ रही है क्योंकि रूस और यूक्रेन दोनों में ही एक समानता देखने को मिल रही है कि वह डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावों पर बहुत धीरे धीरे काम कर रहे हैं और किसी जल्दबाजी में नहीं दिख रहे। उन्होंने कहा कि जहां तक युद्ध क्षेत्र की बात है तो रूस तेजी से आगे बढ़ता जा रहा है और अमेरिका यूक्रेन की जिस खनिज संपदा पर अपनी नजर बनाये हुए है उस पर भी पुतिन की सेना कब्जा करती जा रही है।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि हालांकि वोलोदिमीर जेलेंस्की ने “बिना शर्त युद्ध विराम” में शामिल होने के लिए यूक्रेन की तत्परता की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा एक और बयान देखने को मिला है कि चीन यूक्रेन में युद्ध को समाप्त करने में “रचनात्मक भूमिका” निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि चीन का यह बयान ऐसे समय आया है जबकि वह रूस को उसके “हितों” की रक्षा करने में सहायता कर रहा है। उन्होंने कहा कि चीनी विदेश मंत्री इस समय मास्को में हैं और अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ चर्चा करने के अलावा राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मिलने वाले हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा अमेरिका में रूस के नये राजदूत भी राष्ट्रपति ट्रंप और रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए अमेरिकी वार्ताकार से मुलाकात करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि एकाध दिनों में कई महत्वपूर्ण वार्ताएं होनी हैं जिनसे कुछ ना कुछ निकल कर आयेगा ही। उन्होंने कहा कि वैसे एक बात तो है कि ट्रंप जिस तरह शुरू में दावा कर रहे थे कि वह 24 घंटे में रूस-यूक्रेन युद्ध को बंद करा देंगे उसके बारे में उन्हें पता चल गया होगा कि यह मामला कितना जटिल है और आसानी से सुलझने वाला नहीं है।
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ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह रहे हैं कि उन्हें उम्मीद है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए समझौते के “अपने हिस्से को पूरा करेंगे”। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने साथ ही कहा कि मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि रूस योजना का पालन करे। उन्होंने कहा कि जहां तक एचएएल की ओर से रूस को तकनीक देने की खबर की बात है तो वह बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि भारत के विदेश मंत्रालय ने न्यूयॉर्क टाइम्स की एक खबर का जोरदार खंडन किया है जिसमें आरोप लगाया गया है कि भारत के सरकारी स्वामित्व वाली हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने रूस को “ब्रिटिश संवेदनशील उपकरण भेजे” हो सकते हैं, जिससे मास्को को यूक्रेन के खिलाफ अपने युद्ध प्रयास को जारी रखने में मदद मिली।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि जहां तक रूसी सेना की बात है तो इसमें कोई दो राय नहीं कि वह दुनिया में अब सबसे शक्तिशाली हो गयी है क्योंकि उसके पास तीन सालों से लगातार युद्ध लड़ने और जीत की राह पर आगे बढ़ने का अनुभव है। रूसी सेना के पास इस बात का भी अनुभव है कि कैसे उसने नाटो देशों के एक से बढ़कर एक हथियारों से किये गये हमलों को विफल कर दिया। उन्होंने कहा कि पुतिन अब अपनी सेना की क्षमता में और बड़ा इजाफा करने जा रहे हैं क्योंकि उन्होंने एक दशक की सबसे बड़ी भर्ती का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि रूसी सरकार 18 से 30 वर्ष आयु के 1 लाख 60 हजार युवाओं को सेना में शामिल करने जा रही है। उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि रूस की सेना में 23 लाख 90 हजार जवान होने चाहिए। इसमें 15 लाख सक्रिय सैनिक हों इसके लिए वह भर्ती का महा-अभियान चलाएंगे। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि नई भर्ती का ऐलान ऐसे समय पर हो रहा है जब अमेरिका रूस पर संघर्षविराम के लिए दबाव बना रहा है।