रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सीजफायर के लिए तो राजी हो गए हैं। लेकिन पुतिन ने अपनी तोंप और बंदूकों को शांत रखने के लिए कुछ शर्तें अमेरिका के सामने रखी हैं। पुतिन ने अमेरिका से यूक्रेन को हथियार की सप्लाई बंद करने को कहा है। यूरोप की तरफ से ये फैसला लिया जाना चाहिए। साथ ही जंग में कब्जाई गई जमीन पर रूस का ही कंट्रोल होगा। नाटो की तरफ से वादा किया जाए कि यूक्रेन को सदस्य नहीं बनाया जाएगा। ये कुछ सशर्ते सीजफायर के लिए पुतिन राजी हुए हैं। यूक्रेन की तरफ से लगातार नाटो का सदस्य बनाने की मांग की जा रही है। लेकि भविष्य में भी नाटो इस पर बिल्कुल भी अमल न करे कुछ इस तरह का वादा पुतिन अमेरिका से चाहते हैं। यूक्रेन न्यूट्रल पोजीशन में रहेगा। इसके साथ ही यूक्रेन की सेना में नई भर्ती न की जाए। कुर्क में मौजूद यूक्रेन के सैनिकों को सरेंडर करना होगा।
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को संदेह है कि पुतिन ट्रंप को दिखावटी समर्थन देने के अलावा और कुछ नहीं कर रहे हैं, जबकि रूसी सेना उनके देश पर बमबारी जारी रखे हुए है। यूक्रेन का कहना है कि वह सीमा से जुड़ी कोई छूट देने को तैयार नहीं है। दूसरी शर्त है कि वह नाटो के लिए पुतिन की बात मंजूर नहीं करेगा। इसके अलावा रक्षा क्षमता को लेकर पुतिन की कोई सलाह नहीं मानी जाएगी। वाइट हाउस के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने रूस जाकर पुतिन से शांति समझौते पर चर्चा की थी, जिसमें रूस ने कुछ शर्ते रख दी थीं। उन्हीं शर्तों को नकारते हुए यूक्रेन ने अपनी शर्तें रखी हैं।
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अपने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान युद्ध को शीघ्र समाप्त करने का संकल्प जताने वाले ट्रंप ने कई बार पुतिन के साथ अपने संबंधों का बखान किया और रूस के अकारण आक्रमण के लिए यूक्रेन को दोषी ठहराया। इतना ही नहीं उन्होंने जेलेंस्की पर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप में सबसे बड़े युद्ध को अनावश्यक रूप से लंबा खींचने का आरोप लगाया। रूस ने 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण शुरू करने के बाद यूक्रेन के चार क्षेत्रों पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। इनमें पूर्व में डोनेत्स्क और लुहान्स्क क्षेत्र तथा देश के दक्षिण-पूर्व में खेरसॉन और ज़ापोरिज्जिया क्षेत्र शामिल हैं, लेकिन चारों में से किसी पर भी उसका पूरी तरह से नियंत्रण नहीं है।