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Modi-Trump की दोस्ती नहीं आई भारत के किसी काम, 2 April से India पर Reciprocal Tariffs लगायेगा America

राष्ट्रपति पद पर दोबारा लौटने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र में दिये गये अपने पहले संबोधन में कई बड़े ऐलान तो किये ही हैं साथ ही अपने कई हालिया फैसलों के लिए हो रही उनकी आलोचनाओं का भी करारा जवाब दे दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने जिस तरह टैरिफ युद्ध को अमेरिका के लिए फायदेमंद बताया, जिस तरह एलन मस्क की ओर से गैर-जरूरी कर्मचारियों को सरकारी नौकरी से हटाये जाने को सही ठहराया, जिस तरह अपनी विस्तारवादी नीति को सही ठहराया वह दर्शाता है कि ट्रंप जो बातें ठान कर व्हाइट हाउस में आये थे उसे वह पूरा करके ही दम लेंगे। ट्रंप ने अपने संबोधन में आव्रजन, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा की दिशा में उठाए गए कदमों पर चर्चा की।
हम आपको बता दें कि ट्रंप ने जब यह कहा कि उनके हालिया फैसलों की वजह से ‘अमेरिका वापस आ गया है’ और अमेरिका का विश्वास व सम्मान लौटा है तो इसके विरोध में कुछ डेमोक्रेट बाहर चले गए। 100 मिनट का यह भाषण आधुनिक अमेरिकी इतिहास में राष्ट्रपति की ओर से कांग्रेस में दिया गया सबसे लंबा भाषण था। इस भाषण को सिर्फ अमेरिकी कांग्रेस में बैठे नेता ही नहीं सुन रहे थे बल्कि विश्व नेता भी ट्रंप के भाषण पर करीब से नजर रख रहे थे।

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ट्रंप ने अपने भाषण के केवल कुछ मिनट ही विदेश नीति को समर्पित किये और अर्थव्यवस्था से जुड़े बिंदुओं को गहराई से छुआ। ट्रंप ने साफ कहा कि शुल्क अमेरिका को फिर से अमीर और महान बनाने के लिए हैं। ट्रंप ने संघीय बजट को संतुलित करने की कसम खाई, यहां तक कि उन्होंने सांसदों से एक व्यापक कर कटौती एजेंडा लागू करने का आग्रह भी किया। हम आपको बता दें कि अमेरिकी कांग्रेस को इस साल के अंत में देश की ऋण सीमा बढ़ाने की ज़रूरत है या फिर विनाशकारी डिफ़ॉल्ट का जोखिम उठाना होगा। ट्रंप ने बार-बार अपने पूर्ववर्ती जो बाइडन पर विभिन्न फैसलों को लेकर हमला भी किया। राष्ट्रपति ने साथ ही अरबपति व्यवसायी एलन मस्क और उनके सरकारी दक्षता विभाग की प्रशंसा की, जिन्होंने 100,000 से अधिक संघीय कर्मचारियों की संख्या कम कर दी है, अरबों डॉलर की विदेशी सहायता में कटौती की है और कई एजेंसियों को बंद कर दिया है। राष्ट्रपति ने मस्क को “सैंकड़ों अरब डॉलर की धोखाधड़ी” की पहचान करने का श्रेय भी दिया। गैलरी में बैठे मस्क को रिपब्लिकन से भी सराहना मिली।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कांग्रेस से 4.5 ट्रिलियन डॉलर की व्यापक योजना पारित करने का आह्वान किया, जो उनके 2017 के कर कटौती का विस्तार करेगी, सीमा सुरक्षा कड़ी करेगी और बड़े पैमाने पर निर्वासन के काम के लिए निधि देगी। ट्रंप ने कहा कि पिछले महीने अवैध रूप से सीमा पार करने की घटनाएं अब तक की सबसे कम रहीं क्योंकि उनका प्रशासन इस समस्या को पूरी तरह खत्म करने के लिए सख्त कदम उठा रहा है।
इसके साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और चीन सहित अन्य देशों द्वारा उच्च शुल्क लगाए जाने की आलोचना करते हुए इसे ‘‘बेहद अनुचित’’ करार दिया है। ट्रंप ने साथ ही घोषणा की है कि अगले महीने से जवाबी शुल्क लगाए जाएंगे। ट्रंप ने मंगलवार रात अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘अन्य देशों ने दशकों से हमारे खिलाफ शुल्क लगाए हैं और अब हमारी बारी है कि हम उन देशों के खिलाफ इसका इस्तेमाल करें।” उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ (ईयू), चीन, ब्राजील, भारत, मेक्सिको और कनाडा क्या आपने उनके बारे में सुना है। ऐसे अनेक देश हैं जो हमारी तुलना में हमसे बहुत अधिक शुल्क वसूलते हैं। यह बिल्कुल अनुचित है। राष्ट्रपति ने जवाबी शुल्क को लेकर अपना पक्ष रखा और कहा कि ये दो अप्रैल से लगाए जाएंगे। अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘‘हमारे उत्पादों पर चीन का औसत शुल्क दोगुना है… और दक्षिण कोरिया का औसत शुल्क चार गुना ज्यादा है। जरा सोचिए, चार गुना ज्यादा और हम दक्षिण कोरिया को सैन्य रूप से तथा कई अन्य तरीकों से इतनी मदद देते हैं। लेकिन यही होता है। यह दोस्त और दुश्मन दोनों की तरफ से हो रहा है। यह प्रणाली अमेरिका के लिए उचित नहीं है।”
‘व्हाइट हाउस’ में अपने दूसरे कार्यकाल में कांग्रेस को पहली बार संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘भारत हमसे 100 प्रतिशत से अधिक ऑटो शुल्क वसूलता है।’’ उन्होंने कहा कि हम भी जवाब में वैसे ही शुल्क लगाएंगे। हम आपको याद दिला दें कि फरवरी में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि उनका प्रशासन ‘‘जल्द’’ भारत और चीन जैसे देशों पर जवाबी शुल्क लगाएगा, उन्होंने पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान भी यह बात कही थी। हम आपको बता दें कि ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत को अमेरिका के जवाबी शुल्क से नहीं बख्शा जाएगा। ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया है कि शुल्क संरचना पर कोई भी उनसे बहस नहीं कर सकता।
उन्होंने यूक्रेन के साथ खनिज सौदे को आगे बढ़ाने की इच्छा का संकेत भी दिया। ट्रंप ने कहा, “साथ ही, हमने रूस के साथ गंभीर चर्चा की है और हमें मजबूत संकेत मिले हैं कि वे शांति के लिए तैयार हैं।” उन्होंने कहा कि उन्हें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से एक अहम पत्र मिला है जिसके मुताबिक उनका देश शांति के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है। ग्रीनलैंड के मुद्दे पर ट्रंप ने कहा कि हम इसे हर हाल में हासिल करके रहेंगे। वहीं उन्होंने मध्य पूर्व में शांति लाने और अब्राहम समझौते का विस्तार करने के अपने वादों को दोहराया है।
बहरहाल, देखना होगा कि अमेरिका की ओर से लगाये जाने वाले टैरिफ पर भारत का क्या रुख रहता है। वैसे हम आपको यह बता दें कि चीन ने ट्रंप द्वारा उसके निर्यात पर दूसरे दौर का 10 प्रतिशत शुल्क लगाने के जवाब में अमेरिकी उत्पादों पर अतिरिक्त 15 प्रतिशत शुल्क लगा दिया है। चीन ने इसके साथ ही विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में अमेरिका के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी है। हालांकि, चीन ने एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने के लिए वार्ता के लिए दरवाजे खुले रखे हैं।
दूसरी ओर, विशेषज्ञों ने राय जताई है कि अमेरिका द्वारा चीन, मेक्सिको और कनाडा पर उच्च शुल्क लगाए जाने से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अपना निर्यात बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों ने कहा है कि जिन क्षेत्रों को लाभ हो सकता है उनमें कृषि, इंजीनियरिंग, मशीन उपकरण, परिधान, कपड़ा, रसायन और चमड़ा शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान जब अमेरिका ने चीनी वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगाया था, तो भारत चौथा सबसे बड़ा लाभार्थी था।

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