डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी के बीच हाल ही में बातचीत ने भारत और अमेरिका के रिश्तों को नई ऊंचाईयों पर पहुंचा दिया। लेकिन सबसे बड़ी खबर ये है कि ट्रंप प्रशासन ने खालिस्तानी समर्थकों और अमेरिका में अवैध तरीके से रहने वाले गैर कानूनी नागरिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। अब आप कहेंगे कि ट्रंप से पहले कमला हैरिस और बाइडेन प्रशासन की ओर से कोई कदम क्यों नहीं उठाए गए थे। दरअसल, जब कमला हैरिस अमेरिका की उपराष्ट्रपति थीं तो उम्मीद थी कि भारतीय मूल की इस नेता से भारत को समर्थन मिलेगा। लेकिन खालिस्तानी समर्थकों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इन तत्वों ने भारत के तिरंगे का अपमान किया, भारतीय दूतावास पर हमले किए और सिख फॉर जस्टिस जैसे अलदाववादी संगठनों के जरिए भारतीय विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दिया।
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डोनाल्ड ट्रंप के शपथ के साथ ही गुरुद्वारों और चर्चों पर छापेमारी की गई। ट्रंप प्रशासन की ओर से गुरुद्वारों और चर्चों में छुपे अवैध अप्रवासियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ये वे स्थान थे जहां खालिस्तानी समर्थक पनाह लेते थे। अमेरिका में खालिस्तानी समर्थक अक्सर अवैध रुप से प्रवेश करते थे और भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होते थे। अब इनकी पहचान करके इन्हें डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही साथ गुरुद्वारओं और चर्चों को भी चेतावनी दी है कि अगर वे अवैध इमीग्रेंट को शरण देंगे तो उन पर भी कार्रवाई होगी। ट्रंप के शपथ लेते ही होमलैंड सिक्योरिटी ने बाइडेन प्रशासन की नीति को रद्द कर दिया, जिसने गुरुद्वारों या चर्च जैसे पूजा स्थलों सहित संवेदनशील क्षेत्रों में या उसके आसपास कानून प्रवर्तन को प्रतिबंधित कर दिया था। सिख अमेरिकन लीगल डिफेंस एंड एजुकेशन फंड (एसएएलडीएफ) ने आव्रजन प्रवर्तन कार्रवाइयों पर प्रतिबंध के संबंध में पूजा स्थलों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को नामित करने वाले पूर्व के दिशा-निर्देशों को रद्द करने के निर्देश पर गंभीर चिंता व्यक्त की। एसएएलडीएफ ने कहा कि नीति में परेशान करने वाले इस बदलाव के साथ ही समुदाय से ऐसी रिपोर्ट सामने आई, जिसमें निर्देश जारी होने के कुछ ही दिनों बाद डीएचएस अधिकारियों ने न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी क्षेत्रों में गुरुद्वारों का दौरा किया।
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आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी के बीच हाल ही में एक फोन कॉल हुई। ये कॉल ट्रंप के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद हुई। दोनों नेताओं ने इंडो पेसेफिक मीडिल ईस्ट और यूरोप में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। फोन कॉल की सबसे खास बात ये थी कि दोनों देशों के बीच रक्षा और व्यापार को लेकर नए समझौतों की बात हुई है। वहीं अगर बात खालिस्तानी समर्थकों की करें तो इनकी गतिविधियों पर रोक लगाना न केवल भारत के लिए बल्कि अमेरिका के लिए भी एक बड़ी प्राथमिकता बन गई है। खालिस्तानी अक्सर भारत विरोधी गतिविधियां करने के बाद अमेरिका में शरण मांगते थे। वे दावा करते थे कि भारत सरकार से उन्हें खतरा है। इसी आधार पर वे अमेरिकी नागरिकता हासिल करने की कोशिश करते थे। हालिया ट्रंप प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार गुरुद्वारों में इन अवैध इमीग्रेंट्स को रहने और खाने की सुविधा मिलती थी। ट्रंप प्रशासन ने अब इन जगहों पर छापेमारी शुरू कर दी है।